
रतलाम /रतलाम शहर में ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ के अंतर्गत सोमवार को सुबह संत समाज, गो-सेवकों एवं जागरूक नागरिकों द्वारा भव्य रैली निकाली इन्होंने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर गौ माता को राष्ट्रीय सम्मान देने और गौ तस्करी व वध पर रोक लगाने की मांग की

गौ रक्षक संत समाज और हिंदू समाज कलिका माता मंदिर परिसर में एकत्र हुए यहां से रैली के रूप में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे भारत के प्रधानमंत्री के नाम एक विस्तृत प्रार्थना पत्र ज्ञापन। तहसीलदार रामचंद्र पांडेय सौंपा गया।

इस प्रार्थना पत्र में देशभर में गोवंश की वर्तमान स्थिति को चिंताजनक बताते हुए उनके संरक्षण, संवर्धन एवं सम्मान हेतु ठोस और प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई।प्रमुख रूप से केंद्रीय स्तर पर एकीकृत गो-सेवा एवं संरक्षण कानून, स्वतंत्र गो-पालन मंत्रालय की स्थापना, गोवंश को राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने, तथा गो-तस्करी एवं अवैध वध पर कठोर दंडात्मक प्रावधान लागू करने की बात कही गई।

अभियान से जुड़े संत एवं गौ सेवकों ने बताया कि यह आंदोलन पूर्णतः सामाजिक, अहिंसक एवं गैर-राजनीतिक है, जिसका उद्देश्य समाज में गो-सेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सरकार का ध्यान इस महत्वपूर्ण विषय की ओर आकर्षित करना है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि गोवंश केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि कृषि, पर्यावरण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
ज्ञापन में गो-आधारित प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने, गोशालाओं के सुदृढ़ीकरण, चारागाह भूमि संरक्षण, गो-उत्पादों के प्रोत्साहन, तथा राजमार्गों पर गो-एम्बुलेंस एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसी महत्वपूर्ण मांगें भी शामिल हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित संतों ने कहा कि “गो माता के सम्मान, सुरक्षा और सेवा के लिए यह अभियान जन-आंदोलन का रूप ले रहा है और देशभर में इसके माध्यम से लाखों नागरिक अपनी आवाज़ सरकार तक पहुंचा रहे हैं।”
अंत में सभी संतों एवं गौ भक्तों ने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि इस ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्तर पर शीघ्र कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
नोट
अभियान को कुल पाँच चरणों में संचालित किया जा रहा है, जिसमें आज प्रथम चरण के अंतर्गत ज्ञापन सौंपने का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ।
द्वितीय चरण में 27 जुलाई 2026 को जिला कलेक्टर को पुनः प्रार्थना पत्र दिया जाएगा
तृतीय चरण में 27 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल को ज्ञापन प्रस्तुत किया जाएगा
चतुर्थ चरण 27 जनवरी 2027 से प्रारंभ होकर 15 अगस्त 2027 तक केंद्र सरकार से आह्वान एवं संवाद के रूप में चलेगा। इसके पश्चात भी यदि कोई निर्णय नहीं होता है, तो पंचम चरण में संत समाज द्वारा दिल्ली में भक्ति स्वरूप आमरण अनशन किया जाएगा।”

