रतलाम/अलकापुरी में भक्ति-संगीत से हुआ भव्य स्वागत, सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों पर दिया बल : “मोबाइल व्रत अपनाएँ, परिवार बचाएँ” : संत श्री हरिराम महाराज

रतलाम 28 अप्रैल “गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना, चरणों में जगह देना…मैं शरण पड़ा तेरी, चरणों में जगह देना…मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे…गुरुदेव साँवरिया मेरे… मैंने जन्म लिया, जग में आया… तेरी कृपा से नर तन पाया…”_

इन सुमधुर भजनों की स्वर-लहरियों पर अलकापुरी क्षेत्र की मातृशक्ति ने जब पूर्व पार्षद वन्दना अनिल पुरोहित के निवास पर अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय, शाहपुरा पीठ, जोधपुर के परम पूज्य रामस्नेही संत हरिराम महाराज शास्त्री की अगवानी की, तो सम्पूर्ण क्षेत्र भक्तिभाव से सराबोर हो उठा।

संत श्री के आगमन का समाचार प्राप्त होते ही बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक अलकापुरी चौराहे पर एकत्रित हुए और ढोल-नगाड़ों के साथ शोभायात्रा के रूप में पूज्य संत श्री को प्रवचन स्थल तक ले गए।

राष्ट्र संत प्रखर वक्ता परम पूज्य हरिराम महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में परिवारों में विघटन तीव्र गति से बढ़ रहा है परिवार के सदस्यों में ही आत्मीयता का अभाव दृष्टिगोचर हो रहा है। साथ बैठकर भोजन ग्रहण करने की सनातन परम्परा लुप्त होती जा रही है और उसके स्थान पर साथ बैठकर मोबाइल चलाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे पारस्परिक संवाद समाप्त हो रहा है। यही पारिवारिक विघटन का मूल कारण है। अब समय आ गया है कि हम ‘मोबाइल व्रत’ का संकल्प लें, ताकि घर-परिवार में आत्मीय संवाद स्थापित हो और परिवार सुखमय एवं खुशहाल बन सके।

पूज्य संत श्री ने आगे कहा,“रतलाम धर्मनगरी है और यह मेरा परम सौभाग्य है कि एक माह में ही मुझे दो बार यहाँ कथा श्रवण कराने का अवसर प्राप्त हुआ। हमें अपने सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को पहचानना होगा। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से हम अपनी गौरवशाली परम्परा, संस्कार और वैदिक शिक्षा को नवीन पीढ़ी तक पहुँचाकर उन्हें धर्मनिष्ठ एवं संस्कारवान बना सकते हैं।”

इस अवसर पर ब्यावर से पधारे भगवताचार्य पं. गोपाल राम महाराज,जवाद से पधारे संत मगनी राम महाराज ने भी गुरु-महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा, “गुरु द्वारा प्रदत्त शिक्षा आत्मा में ज्ञान का दीप प्रज्ज्वलित करती है। गुरु के बिना ज्ञान की कोई परिभाषा नहीं। उन्हीं के सान्निध्य में मन प्रफुल्लित होता है। गुरु की छत्रछाया में जीवन सुखमय होता है। जो उनका आदर करता है, वह विजय को प्राप्त करता है। गुरु के चरणों में जो मस्तक झुकाता है, जीवन उसका सच्चा मित्र बन जाता है। इसीलिए शास्त्रों में गुरु को ईश्वर-तुल्य माना गया है।”

‘संस्कार और धर्म’ विषय पर आयोजित इस दिव्य प्रवचन में जोधपुर से पधारे रामसनेही संत हनुमत राम, जवाद से पधारे संत मगनी राम वैद्य शिवराम सहित अनेक संतवृन्द उपस्थित रहे।

प्रारम्भ में पूज्य संत श्री का स्वागत सूर्यकांत पुरोहित, नरेंद्र यादव, रामस्नेही हरि मानव सेवा संस्था के अध्यक्ष प्रकाश परमार, पूर्व पार्षद अशोक देवड़ा, रेलवे डीआरयूसीसी मेंबर अनिल उपाध्याय व रेलवे पीआरकेपी के मंडल मंत्री पुष्पेंद्र पाराशर गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष राजेश तिवारी, सर्व ब्राह्मण सभा के उपाध्यक्ष राजेश चाष्टा, नवीन व्यास, राजेश डोरिया, पत्रकार जलज शर्मा, अनिल आचार्य, अभिभाषक नीरज सक्सेना, पंकज परिहार, विनीत कौशिक, अनिता आचार्य, प्राची पुरोहित, अश्विन तिवारी, सीमा सांखला, रानी परमार, इंदु शर्मा, श्वेता तिवारी, हर्षुल अग्रवाल, मंजू शर्मा, अरुशा शर्मा आदि गणमान्य नागरिकों एवं भक्तजनों ने किया। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन सामाजिक कार्यकर्ता अनिल पुरोहित ने किया।

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