रतलाम/सांदीपनी विद्यालय विनोबा, रतलाम में हुआ अकादमिक संवाद ; विश्व के पाँच उत्कृष्ट विद्यालयों के नवाचारों पर मंथन,वैश्विक नवाचारों को स्थानीय स्तर पर अपनाने का लिया संकल्प

रतलाम 05 जून गुणवत्तापूर्ण एवं नवाचारी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सांदीपनी विद्यालय, विनोबा, रतलाम में “विश्व के श्रेष्ठ विद्यालय पुरस्कार–2025 से सीख” विषय पर विशेष अकादमिक संवाद आयोजित किया गयाकार्यक्रम का उद्देश्य विश्व के उत्कृष्ट विद्यालयों की कार्यप्रणालियों, नवाचारों एवं शिक्षण मॉडल का अध्ययन कर उन्हें स्थानीय स्तर पर लागू करने की संभावनाओं पर विचार करना था

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के शिक्षक राजेन्द्र शर्मा द्वारा रचित विद्यालय गीत “हम हैं सांदीपनी विद्यालय” पर आधारित एंट्री रूटीन से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को उत्साह, ऊर्जा एवं विद्यालयीय गौरव की भावना से ओत-प्रोत कर दिया

कार्यक्रम की परिकल्पना एवं संचालन गजेन्द्र सिंह राठौर ने किया। उन्होंने अंतराष्ट्रीय संस्था टी फ़ॉर एजुकेशन द्वारा चयनित विश्व के पाँच श्रेष्ठ विद्यालयों की समुदाय भागीदारी ,पर्यावण
जुड़ाव ,नवाचार ,विपत्तियों से मुकाबला, स्वस्थ जीवन का समर्थन आदि का प्रारम्भिक परिचय देते हुए बताया कि “प्रत्येक विद्यालय अपनी स्थानीय परिस्थितियों में कार्य करते हुए भी वैश्विक स्तर पर परिवर्तन का प्रेरक उदाहरण बन सकता है।

कार्यक्रम के अंतर्गत संस्था के 5 शिक्षकों ने विभिन्न देशों के पुरस्कार प्राप्त 5 विद्यालयों के उत्कृष्ट कार्यों का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया।

संवाद के दौरान बिद्राक्षी पंवार ने मेक्सिको के “आ फावोर देल नीन्यो” विद्यालय के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि विद्यालय ने तीन सौ साठ डिग्री सामुदायिक सहयोग मॉडल के माध्यम से अभिभावकों एवं स्थानीय समुदाय को शिक्षा का सक्रिय भागीदार बनाकर साझा उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।

कविता वर्मा ने संयुक्त अरब अमीरात के आर्बर विद्यालय की पर्यावरण संरक्षण संबंधी पहलों का परिचय देते हुए बताया कि विद्यालय ने पर्यावरणीय साक्षरता, जैव-गुंबद (बायोडोम), जैव विविधता तथा प्रकृति आधारित अधिगम के माध्यम से विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित किया है।

हर्षिता सोलंकी ने संयुक्त राज्य अमेरिका के फ्रैंकलिन विद्यालय के नवाचार आधारित शिक्षण मॉडल पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विद्यालय में स्थापित फैब-लैब के माध्यम से विद्यार्थियों में रचनात्मकता, वैज्ञानिक सोच, डिज़ाइन चिंतन तथा समस्या समाधान की क्षमता का विकास किया जा रहा है।

श्यामा वर्मा ने ब्राज़ील के एस्कोला एस्तादुअल पार्के दोस सोन्योस विद्यालय की प्रेरक यात्रा प्रस्तुत करते हुए बताया कि विद्यालय ने इक्कीस नवाचारी परियोजनाओं के माध्यम से कठिन परिस्थितियों के बीच शांति, अहिंसा, विश्वास और सकारात्मक विद्यालयी संस्कृति का निर्माण कर शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

हीना शाह ने मलेशिया के एस.के. पुत्राजया प्रेसिन्ट ११(१) विद्यालय की विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं समग्र कल्याण के लिए विकसित अभिनव पहलों की जानकारी देते हुए बताया कि विद्यालय ने “हेल्पी” मोबाइल अनुप्रयोग के माध्यम से विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का सराहनीय कार्य किया है।

स्थानीय स्तर पर लागू होंगे वैश्विक अनुभव

समापन सत्र में राजाराम सेकवाडिया एवं शोभा ओझा ने दक्षता-आधारित शिक्षा तथा विद्यालय में संचालित विभिन्न नवाचारी प्रकल्पों की जानकारी साझा करते हुए इन वैश्विक अनुभवों को स्थानीय स्तर पर लागू करने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला साथ ही शासकीय हाई स्कूल, कनेरी से आमंत्रित शिक्षिका श्रद्धा सोनी एवं अन्य अतिथियों ने भी संवाद में सहभागिता की।
इस अवसर पर प्रतिभागियों ने अपने अनुभव भी साझा किए।
श्रद्धा सोनी ने कहा, “ मैं अपने विद्यालय में इन मॉडलों का प्रशिक्षण आयोजित करके चरणबद्ध रूप से उन्हें लागू करने का प्रयास करूँगी।”
माधुरी तलेरा ने कहा, “आज का यह अकादमिक संवाद केवल जानकारी देने वाला कार्यक्रम नहीं, बल्कि परिवर्तन की प्रेरणा है। मैं अपने कक्षाकक्ष में सहयोगात्मक अधिगम, पर्यावरणीय जागरूकता, जीवन कौशल तथा नवाचारी शिक्षण गतिविधियों को शामिल करूँगी।”

इस ऐतिहासिक संवाद के दौरान प्राचार्य संध्या वोरा, प्रधान अध्यापक अनिल मिश्रा, सीमा चौहान, वंदना सोवणचा, भावना रावत, मनीषा चौधरी, सुनीता पँवार, रूपाली जैन, साक्षी शर्मा, अजय मरमट, प्रदीप वैष्णव, अमित झा, अनीता शर्मा, माधुरी तलेरा, प्रह्लाद बैरागी तथा हरिओम पँवार सहित विद्यालय के समस्त शिक्षक उपस्थित रहे कार्यक्रम की टेक्निकल कमान पिंकी सोलंकी ने संभाली।

कार्यक्रम के अंत में सभी शिक्षकों ने संकल्प लिया कि विश्व के श्रेष्ठ विद्यालयों की सफल कार्यप्रणालियों का अध्ययन कर उन्हें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यालय की शिक्षण प्रक्रिया में चरणबद्ध रूप से सम्मिलित किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, नवाचारी एवं जीवनोपयोगी शिक्षा प्रदान की जा सके।

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