नामली /नगर परिषद की बेरुखी पर भारी पड़ीजन भावना ;नि -स्वार्थ सेवा समिति’ ने जनसहयोग से किया जर्जर स्वास्तिक स्तंभ का कायाकल्प : सात दिन के अल्टीमेटम के बाद समिति ने खुद उठाया बीड़ा; अब पक्षियों के लिए सकोरों में भरा जाएगा दाना-पानी

नामली।शांतिवन मुक्तिधाम नामली में वर्षों पहले हुए मुक्तिधाम घोटाले की भेंट चढ़ा धार्मिक ‘स्वास्तिक स्तंभ’ आखिरकार जनसहयोग से सज-संवर गया है। नगर परिषद नामली की लंबे समय से चली आ रही बेरुखी और अनदेखी के बाद, श्री निःस्वार्थ सेवा समिति ने अपने दम पर इस जर्जर और खतरनाक हो चुके स्तंभ का जीर्णोद्धार कर एक नई मिसाल पेश की है।

हादसे को दे रहा था आमंत्रण,परिषद ने नहीं दी अनुमति

मुक्तिधाम परिसर में वर्षों पहले बना यह स्वास्तिक स्तंभ और उसकी पेढ़ी लंबे समय से अत्यंत जर्जर अवस्था में थी। स्तंभ के शीर्ष पर निर्मित ‘ऊं’ और त्रिशूल का एक हिस्सा इस कदर टूट चुका था कि वह कभी भी परिसर में अंतिम संस्कार में शामिल होने आने वाले लोगों पर गिर सकता था। किसी बड़े हादसे की आशंका को देखते हुए श्री निःस्वार्थ सेवा समिति पिछले कई वर्षों से नगर परिषद से इसके कायाकल्प की मांग कर रही थी। हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने न तो खुद इसका जीर्णोद्धार कराया और न ही समिति को इसकी अनुमति दे रहे थे।

सात दिन का अल्टीमेटम और जनसहयोग का संकल्प

नगर परिषद के इस अड़ियल रवैये को देखते हुए समिति के अध्यक्ष व जागरूक पत्रकार शैलेंद्र कोठारी और अन्य सदस्यों ने परिषद को सात दिवसीय अल्टीमेटम दिया था। चेतावनी दी गई थी कि यदि प्रशासन इस धार्मिक स्तंभ का जीर्णोद्धार नहीं करता है, तो समिति जनसहयोग से खुद यह कार्य करेगी। समय सीमा समाप्त होने के बाद समिति ने अपने संकल्प को पूरा किया।

स्तंभ के खतरनाक और जर्जर हिस्से को हटाकर वरिष्ठ दानदाता बंटी डाबी के पूजनीय माता-पिता (स्वर्गीय शंकर लाल डाबी व स्वर्गीय लीला बाई डाबी) तथा समिति के वरिष्ठ सदस्य अशोक रघुवंशी के पूजनीय पिता (स्वर्गीय पीरुलाल रघुवंशी) की पावन स्मृति में इस पूरे स्वास्तिक स्तंभ और पेढ़ी का भव्य कायाकल्प किया गया।

पक्षियों के दाने-पानी से हुई नई परंपरा की शुरुआत

कायाकल्प के बाद इस स्थल को जीव-दया के केंद्र के रूप में विकसित किया गया है

दानदाता बंटी डाबी ने बताया कि मुक्तिधाम के बगीचे में बड़ी संख्या में पक्षी आते हैं। अब इस नवनिर्मित स्वास्तिक स्तंभ की पेढ़ी पर नियमित रूप से पक्षियों के लिए दाना डाला जाएगा और सकोरों में पानी भरा जाएगा।

इस मानवीय और धार्मिक कार्य के साथ ही परिसर में एक नई परंपरा की शुरुआत की गई। कार्यक्रम के दौरान सकोरों में पानी भरकर और दाना डालकर इसकी शुरुआत की गई,

जिसमें समिति के वरिष्ठ सदस्य पंडित गिरीश शर्मा,कुमावत समाज के वरिष्ठ समाजसेवी भगवती लाल गेहलोत, जितेंद्र रघुवंशी, अनिल माली, कैलाश पांचाल, जितेंद्र डोडियार और समिति के संस्थापक दिलीप कर्णधार विशेष रूप से उपस्थित थे।

अध्यक्ष शैलेंद्र कोठारी ने इस पुनीत कार्य में सहयोग करने वाले सभी दानदाताओं और नगरवासियों का हृदय से आभार व्यक्त किया है।

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