खेड़ी ताल में फिर गरमाया सरकारी जमीन और स्कूल भवन का मुद्दा:अतिक्रमण हटते ही दोबारा कब्जे का खतरा, जर्जर स्कूल और जंग खाता सरकारी सामान बना चुनौती,ग्रामीणों की आवाज और मीडिया की पड़ताल के बाद हरकत में आया प्रशासन

एसडीएम के निर्देश पर जर्जर भवन से आंगनवाड़ी केंद्र हुआ शिफ्ट; अब खाली पड़े शासकीय स्कूल भवन को उपयोग में लाने की उठी मांग..

आलोट/रतलाम ग्राम पंचायत लसुड़ियाखेड़ी अंतर्गत ग्राम खेड़ी ताल एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद अब ग्रामीणों ने दोबारा कब्जे की आशंका जताई है। वहीं दूसरी ओर वर्ष 2016 से बंद पड़ा शासकीय प्राथमिक विद्यालय भवन बदहाली का शिकार होकर खंडहर बनने की कगार पर पहुंच गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन और पंचायत ने ठोस कदम नहीं उठाए तो करोड़ों की शासकीय संपत्ति नष्ट होने के साथ-साथ भविष्य की विकास योजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

ग्रामीणों और मीडिया की पहल के बाद प्रशासन ने लिया एक्शन

खेड़ी ताल में आंगनवाड़ी केंद्र के संचालन को लेकर पिछले कई दिनों से ग्रामीण लगातार आवाज उठा रहे थे। इस मुद्दे को मीडिया द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने और पत्रकारों द्वारा प्रशासन तक शिकायत पहुंचाने के बाद एसडीएम आलोट रचना शर्मा ने मामले का संज्ञान लिया
एसडीएम ने स्पष्ट किया कि जिस भवन में आंगनवाड़ी संचालित हो रही थी उसकी स्थिति जर्जर है और बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इसके बाद एसडीएम ने सीडीपीओ को तत्काल आवश्यक निर्देश जारी किए, जिसके परिणामस्वरूप प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आंगनवाड़ी केंद्र को जर्जर भवन से शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू करवाई। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से लंबित मामले में यह पहली ठोस प्रशासनिक कार्रवाई रही, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर सकारात्मक संदेश गया है।

हालांकि अब ग्रामीणों की मांग है कि आंगनवाड़ी को किसी निजी भवन में संचालित करने के बजाय गांव में वर्ष 2016 से बंद पड़े शासकीय प्राथमिक विद्यालय भवन को मरम्मत कर वहीं संचालित किया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और पूर्णतः शासकीय वातावरण मिल सके।

भविष्य की आंगनवाड़ी के लिए सुरक्षित हो सरकारी जमीन

ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष एक महत्वपूर्ण सुझाव रखा है। उनका कहना है कि बंद पड़े शासकीय स्कूल भवन के पीछे पर्याप्त शासकीय भूमि उपलब्ध है, जहां भविष्य में नया और आधुनिक आंगनवाड़ी भवन बनाया जा सकता है। लेकिन यदि अभी से उस भूमि की सुरक्षा नहीं की गई तो वह भी अतिक्रमणकारियों के निशाने पर आ सकती है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि स्कूल परिसर के पीछे और आसपास की सरकारी भूमि पर तत्काल मजबूत तार फेंसिंग करवाई जाए, ताकि भविष्य की शासकीय परियोजनाओं के लिए भूमि सुरक्षित रह सके।

2016 से बंद स्कूल भवन अब बन रहा खंडहर

गांव का शासकीय प्राथमिक विद्यालय वर्ष 2016 से बंद पड़ा हुआ है। लगातार उपेक्षा और रखरखाव के अभाव में भवन की दीवारों में दरारें आ चुकी हैं, छत कमजोर हो रही है और पूरा परिसर जर्जर होता जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र मरम्मत नहीं कराई गई तो यह महत्वपूर्ण शासकीय भवन पूरी तरह अनुपयोगी हो सकता है। लोगों ने ग्राम पंचायत लसुड़ियाखेड़ी से युद्ध स्तर पर मरम्मत कार्य शुरू कराने की मांग की है।

2024 से स्कूल में बंद पड़ा फेंसिंग का सरकारी सामान

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि वर्ष 2024 से ग्राम पंचायत द्वारा खरीदी गई तार फेंसिंग सामग्री स्कूल भवन के भीतर ताले में बंद पड़ी हुई है ग्रामीणों का आरोप है कि लाखों रुपये की यह सामग्री दो वर्षों से उपयोग के अभाव में जंग खा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि इसी सामग्री का उपयोग कर स्कूल परिसर, प्राचीन पीपल वृक्ष क्षेत्र और पीछे की शासकीय भूमि की सुरक्षा की जा सकती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक कोई कार्रवाई नहीं कर पाया है।

कलेक्टर तक पहुंचेगा मामला

खेड़ी ताल के जागरूक ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्कूल भवन की मरम्मत, शासकीय भूमि की सुरक्षा और फेंसिंग का कार्य शुरू नहीं किया गया तो वे जनसुनवाई में सीधे रतलाम कलेक्टर के समक्ष शिकायत दर्ज कराएंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक भवन या जमीन का मामला नहीं, बल्कि सरकारी संपत्तियों के संरक्षण और गांव के बच्चों के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है।

सबसे बड़ा सवाल

जब सरकारी जमीन उपलब्ध है, फेंसिंग का सामान मौजूद है, बंद पड़ा शासकीय स्कूल भवन भी खड़ा है और प्रशासन आंगनवाड़ी शिफ्टिंग की कार्रवाई कर चुका है, तो फिर स्थायी समाधान की दिशा में कदम कब उठाए जाएंगे?

खेड़ी ताल में उठी यह आवाज अब स्थानीय मुद्दा नहीं रही, बल्कि शासकीय संपत्तियों के संरक्षण, बच्चों के अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा सवाल बन चुकी है। अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह अस्थायी कार्रवाई से आगे बढ़कर स्थायी समाधान कब सुनिश्चित करता है।

Facebook
WhatsApp