रतलाम कोर्ट का फैसला: हत्या के आरोपी जीवणा को आजीवन कारावास, FSL और DNA रिपोर्ट से खुला था राज,जमानत निरस्त कर भेजा जेल

रतलाम, 17 न्यायालय सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव ने थाना सरवन क्षेत्र में वर्ष 2020 में हुई जीवला उर्फ जीवा की निर्मम हत्या के मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायालय ने गुण-दोष के आधार पर आरोपी जीवणा 52 वर्ष पिता कमजी पारगी, निवासी ग्राम मातर को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 3,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। आरोपी पहले जमानत पर था, लेकिन फैसला आते ही न्यायालय के आदेश से उसे तुरंत जेल भेज दिया गया।

शासकीय अधिवक्ता और अपर लोक अभियोजक समरथ पाटीदार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि घटना 20 दिसंबर 2020 की है। फरियादी महिपाल को उसके रिश्तेदार भीमा निनामा ने फोन पर सूचना दी थी कि उसके पिता जीवला, आरोपी जीवणा के घर के आंगन में मृत पड़े हैं।

जांच में सामने आया कि घटना वाली रात आरोपी जीवणा का अपनी पत्नी, पिता और भाई से झगड़ा हुआ था, जिसके बाद वे सब घर छोड़कर चले गए थे। वहां मौजूद मृतक जीवला वहीं खाट पर सो गया था। रात करीब 3 बजे पड़ोस में रहने वाले बबला ने जीवला की चीख सुनी थी, जिसमें वह कह रहा था— “जीवणा मुझे मत मार, मुझसे तो उठते भी नहीं बन रहा है।”

वैज्ञानिक साक्ष्यों (DNA) ने बढ़ाई आरोपी की मुश्किलें

​सुनवाई के दौरान आरोपी जीवणा ने बचने के लिए कई तर्क दिए, जिन्हें माननीय न्यायालय ने सिरे से खारिज कर दिया। पुलिस ने आरोपी के पास से हत्या में इस्तेमाल किया गया ‘खाखरे का लकड़ा’ (लकड़ी) जप्त किया था। FSL जांच में उस लकड़ी पर मृतक जीवला का DNA प्रोफाइल पाया गया। आरोपी ने तर्क दिया था कि यह खाना पकाने वाली सामान्य लकड़ी है, जिसे कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि खून लगी लकड़ी सामान्य या घरेलू कार्यों में उपयोग नहीं होती।

एक्सीडेंट का झूठा तर्क खारिज

आरोपी ने यह भी दावा किया कि मृतक की मौत अंधेरे में पथरीले रास्ते पर गिरने या दुर्घटना के कारण हुई थी। लेकिन पोस्टमार्टम (PM) रिपोर्ट में मृतक के सिर, हाथ, कोहनी और पैरों पर गंभीर चोटों के निशान मिले, जिससे साफ था कि उस पर बेरहमी से हमला किया गया था।

थाना सरवन पुलिस द्वारा तत्परता से की गई विवेचना, डॉ. की पीएम रिपोर्ट और न्यायालय में अपर लोक अभियोजक समरथ पाटीदार द्वारा प्रस्तुत की गई प्रभावी दलीलों व वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई।

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