
रतलाम।मालवा की पावन धरा और राजस्व प्रबंधन के वैश्विक पथ-प्रदर्शक भगवान टोडरमलजी महाराज की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए शहर में एक नई मांग उठी है। प्रख्यात समाजसेवी जुगल पंड्या ने रतलाम विकास प्राधिकरण (RDA) के अध्यक्ष सेठ मनोहर पोरवाल से औपचारिक चर्चा करते हुए यह प्रस्ताव रखा है कि RDA की किसी प्रमुख कॉलोनी, चौराहे, मैदान या मार्ग का नामकरण ‘भगवान टोडरमलजी महाराज’ के नाम पर किया जाए।
राजस्व सुधारों के युगपुरुष हैं टोडरमलजी
श्री पंड्या ने अपनी मांग के पक्ष में तर्क देते हुए कहा कि आज शासन-प्रशासन में जमीन की नपती, खाता, खसरा और खतौनी जैसी जो पारदर्शी व्यवस्था लागू है, वह भगवान टोडरमलजी महाराज की ही देन है। उन्होंने सदियों पहले भूमि प्रबंधन की जो वैज्ञानिक पद्धति विकसित की थी, वह आज भी शासकीय व्यवस्था का आधार स्तंभ बनी हुई है।
“भगवान टोडरमलजी न केवल जांगड़ा पोरवाल समाज के गौरव हैं, बल्कि वे समस्त हिंदू समाज के आराध्य और प्रेरणास्रोत हैं। आधुनिक राजस्व प्रबंधन के वे वास्तविक शिल्पी हैं।”
— जुगल पंड्या, समाजसेवी
श्रद्धा और विश्वास का केंद्र
समाजसेवी पंड्या ने लोक मान्यताओं का जिक्र करते हुए कहा कि जनमानस में यह अटूट श्रद्धा है कि यदि कोई वस्तु गुम हो जाए, तो भगवान टोडरमलजी महाराज का स्मरण करने मात्र से वह पुनः प्राप्त हो जाती है। ऐसे महान व्यक्तित्व के नाम पर रतलाम विकास प्राधिकरण द्वारा किसी बड़े प्रकल्प की सौगात देना शहर के लिए गौरव की बात होगी।
मांग के मुख्य बिंदु: ऐतिहासिक सम्मान
रतलाम की नई विकसित कॉलोनियों या प्रमुख चौराहों को टोडरमलजी का नाम देकर आने वाली पीढ़ी को उनके योगदान से परिचित कराना।
RDA की भूमिका
विकास प्राधिकरण द्वारा इस नामकरण से शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को मजबूती मिलेगी।
सर्वसमाज की भावना: यह मांग केवल एक समाज विशेष की नहीं, बल्कि उन सभी की है जो न्यायपूर्ण राजस्व व्यवस्था में विश्वास रखते हैं।
अब देखना यह है कि रतलाम विकास प्राधिकरण इस जनभावना का सम्मान करते हुए नगर को यह ‘ऐतिहासिक सौगात’ कब तक प्रदान करता है।

